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मंदिर में जूते चप्पल पहन कर क्यों नहीं जाना चाहिए

हम सभी जानते है की मंदिर में जूते चप्पल पहन कर नहीं जाना चाहिए ऐसा हमें बचपन से ही सिखाया जाता है, मगर ऐसा क्योँ, ऐसा इसलिए मंदिरों का निर्माण इस प्रकार से किया जाता है वहां किसी के द्वारा गंदे पैरों से मंदिर पर प्रवेश करना मतलब वहां की पवित्रता को खराब करना होता है , इसलिए मंदिरों में जूते चप्पल पहन कर जाना गलत है।

मंदिर एक पवित्र स्थान होता है जहाँ जाकर आप सकारात्मक उर्जा का अनुभव कर है. ऐसे में यदि बाहर की गंदगी उनके द्वारा मंदिर में प्रवेश कर जाएगी, वह उर्जा नकारात्मक हो जाएगी और धार्मिक स्थान होने के कारण वह अपवित्र हो जायेगा.

वास्तु के अनुसार भी कहा जाता है की बाहर की जूते चप्पल घर के अन्दर नहीं लानी चाहिए इसके पीछे भी यही कारण की आप दिन भर बाहर रहते है पता नहीं कहाँ कहाँ जाते है और कितनी नेगेटिव एनर्जी अपने साथ लेकर घूमते है वह जूते चप्पल के माध्यम से घर में ना आये इसलिए कहा जाता है की जूते चप्पल पहन कर ना घर में आना चाहिए और ना ही किसी भी धार्मिक स्थान पर जाना चाहिए.

यह नियम मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारा, चर्च सभी जगह लागू है। उनका सिर्फ एक ही कहना होता है कि मंदिरों पर सफाई और वहां की पवित्रता खराब ना हो इसलिए जूते चप्पल वर्जित है।

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